चांडिल में सीट कटौती से हजारों छात्र नामांकन से वंचित, AIDSO 12 सितंबर को करेगा धरना-प्रदर्शन
सिंहभूम कॉलेज में UG सत्र 2026-30 की सीटें बढ़ाने की मांग, संगठन ने विश्वविद्यालय और कॉलेज प्रशासन को आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी

चांडिल: सिंहभूम कॉलेज चांडिल में स्नातक (UG) सत्र 2026-30 में सीटों में कटौती किए जाने से क्षेत्र के हजारों विद्यार्थियों के नामांकन से वंचित होने का मामला सामने आया है। विद्यार्थियों के भविष्य को देखते हुए ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (AIDSO) की सिंहभूम कॉलेज कमेटी की ओर से 12 सितंबर को कॉलेज परिसर में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
AIDSO कॉलेज कमेटी के सचिव राजा प्रमाणिक ने बताया कि सीटों में बढ़ोतरी की मांग को लेकर संगठन की ओर से पूर्व में कोल्हान विश्वविद्यालय के कुलपति को ज्ञापन सौंपा गया था। इसके अलावा राज्यपाल और विश्वविद्यालय प्रशासन को ईमेल के माध्यम से भी मामले की जानकारी दी गई, लेकिन संगठन के अनुसार अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई है।
ग्रामीण विद्यार्थियों पर सबसे अधिक असर का दावा
कमेटी के इंचार्ज सह जिला सचिव युधिष्ठिर प्रमाणिक ने कहा कि सिंहभूम कॉलेज चांडिल अनुमंडल का प्रमुख डिग्री कॉलेज है। ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब और सामान्य परिवारों से आने वाले हजारों विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए इसी कॉलेज पर निर्भर हैं।
उन्होंने कहा कि सीटों में कटौती से सबसे अधिक परेशानी इन्हीं विद्यार्थियों को हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि घाटशिला कॉलेज में विद्यार्थियों का नामांकन लिया गया, जबकि सिंहभूम कॉलेज में सीटों की कमी के कारण छात्र नामांकन से वंचित हो रहे हैं।
सीट बढ़ाने और नामांकन शुरू करने की मांग
AIDSO ने मांग की है कि UG की सीटों में तत्काल बढ़ोतरी की जाए और नामांकन से वंचित सभी पात्र विद्यार्थियों का नामांकन सुनिश्चित किया जाए। संगठन ने नामांकन प्रक्रिया अविलंब शुरू करने की भी मांग की है।
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है तो आगे अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा। AIDSO ने इसके लिए विश्वविद्यालय और कॉलेज प्रशासन को जिम्मेदार ठहराने की बात कही है।
12 सितंबर के आंदोलन में शामिल होने की अपील
AIDSO ने प्रभावित विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षा प्रेमी लोगों से 12 सितंबर के धरना-प्रदर्शन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होनेकी अपील की है। संगठन का कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य वंचित विद्यार्थियों के नामांकन का रास्ता सुनिश्चित कराना है।




