
चांडिल/सरायकेला-खरसावां: सरायकेला-खरसावां जिले के तेंगाडीह गांव का रहने वाला सागर सिंह कभी एक सामान्य छात्र था। गांव के लोगों के अनुसार, वह एक दिन किताब खरीदने के लिए चांडिल गया था, लेकिन इसके बाद उसकी जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया कि वह नक्सली संगठन के संपर्क में आ गया। देखते ही देखते वह संगठन का सक्रिय सदस्य बना और बाद में शीर्ष कमांडरों में उसकी गिनती होने लगी।

सागर सिंह करीब 18 वर्षों तक अपने घर नहीं लौटा। इस दौरान उसके खिलाफ कई नक्सली मामलों में नाम सामने आया। सुरक्षा एजेंसियों ने उसे वांछित घोषित किया और समय के साथ उस पर इनाम की राशि बढ़कर 25 लाख रुपये तक पहुंच गई। वह लंबे समय तक झारखंड के सबसे चर्चित इनामी नक्सलियों में शामिल रहा।
परिजनों के लिए यह दौर बेहद कठिन रहा। वर्षों तक परिवार उसके लौटने की उम्मीद करता रहा, लेकिन वह घर नहीं आया। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि सागर पढ़ाई में रुचि रखने वाला युवक था, इसलिए उसका इस रास्ते पर चले जाना पूरे इलाके के लिए हैरानी और चिंता का विषय बना।
झारखंड में लगातार चल रहे नक्सल विरोधी अभियानों के बीच सागर सिंह का नाम भी समय-समय पर चर्चा में रहा। उसकी कहानी इस बात का उदाहरण मानी जाती है कि एक गलत फैसला या गलत संगत किसी व्यक्ति का पूरा जीवन बदल सकती है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि सागर सिंह के जीवन से जुड़ी कई बातें स्थानीय चर्चाओं और विभिन्न मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं। किसी भी दावे की पुष्टि आधिकारिक अभिलेखों और पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर ही की जानी चाहिए।




