
चाईबासा:प्रकाश गुप्ता: पश्चिमी सिंहभूम पुलिस केंद्र में मंगलवार को प्रतिबंधित भाकपा माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा। संगठन के चार सक्रिय नक्सलियों ने पुलिस और सुरक्षा बलों के समक्ष आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। आत्मसमर्पण करने वालों में 10 लाख रुपये का इनामी जोनल कमांडर सालुका कायम उर्फ भुवनेश्वर भी शामिल है।

आत्मसमर्पण कार्यक्रम में सिंहभूम कोल्हान रेंज के डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा, सीआरपीएफ के डीआईजी, पश्चिमी सिंहभूम के एसपी अमित रेनू, सरायकेला-खरसावां के एसपी मनोज स्वर्गियारी सहित सीआरपीएफ और पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों का स्वागत करते हुए उन्हें मुख्यधारा में लौटने पर शुभकामनाएं दीं।
चारों आत्मसमर्पित नक्सलियों की पहचान

पुलिस के अनुसार आत्मसमर्पण करने वालों में सोनुवा थाना क्षेत्र के कुदाबुरु गांव निवासी 10 लाख रुपये का इनामी जोनल कमांडर सालुका कायम उर्फ भुवनेश्वर शामिल है। इसके अलावा टोंटो थाना क्षेत्र के रेंगड़ाहातु गांव निवासी एक लाख रुपये की इनामी कोदोमुनी कोड़ा, मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के अंजेदबेड़ा गांव निवासी अनीता तामसोय और गोइलकेरा थाना क्षेत्र के ईचागोड़ा गांव निवासी पिंकी ने भी आत्मसमर्पण किया।
ऑपरेशन नवजीवन से नक्सल विरोधी अभियान को मिली मजबूती
पुलिस ने बताया कि नक्सल विरोधी अभियान और पुनर्वास नीति के तहत चलाए जा रहे ऑपरेशन नवजीवन के तीन चरणों में महत्वपूर्ण सफलता मिली है।
ऑपरेशन नवजीवन-I के तहत 21 मई 2026 को 27 में से 25 नक्सल कमांडर और दस्ता सदस्यों ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया था। इनमें छह एसजेडसीएम, छह एसीएम और 13 दस्ता सदस्य शामिल थे। इस दौरान 16 हथियार और 3082 गोलियां जमा कराई गई थीं।
वहीं ऑपरेशन नवजीवन-II के तहत 28 जुलाई 2026 को 14 नक्सल कमांडर और दस्ता सदस्यों ने आत्मसमर्पण किया। इनमें एक आरसीएम, तीन जेडसीएम, एक एसजेडसीएम, छह एसीएम और तीन दस्ता सदस्य शामिल थे। इनके पास से 10 हथियार और 1412 गोलियां बरामद की गई थीं।
अब ऑपरेशन नवजीवन-III के तहत 11 अगस्त को 10 लाख रुपये के इनामी जोनल कमांडर सालुका कायम समेत चार सक्रिय नक्सलियों के आत्मसमर्पण को बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
अभियान के साथ पुनर्वास नीति का भी असर
पुलिस अधिकारियों के अनुसार सुरक्षा बलों और आसूचना एजेंसियों के संयुक्त अभियान, लगातार घेराबंदी और विभिन्न क्षेत्रों में पुलिस कैंपों की स्थापना से नक्सली संगठन पर दबाव बढ़ा है। पुलिस का दावा है कि संगठन के भीतर कथित शोषण और भय के माहौल से परेशान होकर कई नक्सली मुख्यधारा में लौट रहे हैं।
चक्रधरपुर एसडीपीओ डॉ. सैयद मुस्तफा हाशमी के नेतृत्व में चलाए गए सामुदायिक पुलिसिंग कार्यक्रम और स्वास्थ्य शिविरों का भी असर देखने को मिला है। पुलिस के मुताबिक इन गतिविधियों से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण करने वालों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।
सारंडा और पोड़ाहाट क्षेत्र में चलाए गए नक्सल विरोधी अभियानों के दौरान सरायकेला पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व और सुरक्षा बलों के सहयोग से अनीता तामसोय ने भी आत्मसमर्पण किया। पुलिस ने बताया कि सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों को सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत निर्धारित सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
पुलिस के आंकड़ों में नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी सफलता
पुलिस के अनुसार सितंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच पश्चिमी सिंहभूम जिले में 52 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, 18 नक्सली मुठभेड़ में मारे गए और 29 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया। इस अवधि में 49 हथियार, 9214 कारतूस और 15 आईईडी विस्फोटक बरामद किए गए।
वहीं पुलिस की ओर से वर्ष 2025 से जुलाई 2026 तक के आंकड़ों में 49 नक्सलियों के आत्मसमर्पण, 22 नक्सलियों के मुठभेड़ में मारे जाने और 60 नक्सलियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई है।
सारंडा, कोल्हान और पोड़ाहाट नक्सल मुक्त: डीआईजी
डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा ने कहा कि सारंडा, कोल्हान और पोड़ाहाट क्षेत्र को नक्सल मुक्त कर दिया गया है। हालांकि उन्होंने बताया कि सारंडा के जंगलों में कभी सक्रिय रहा एक करोड़ रुपये का इनामी असीम मंडल वर्तमान में सरायकेला और पूर्वी सिंहभूम क्षेत्र में सक्रिय होने की जानकारी है। उसके खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
डीआईजी ने मीडिया के माध्यम से असीम मंडल से भी आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि वह आत्मसमर्पण नहीं करता है तो पुलिस उसकी गिरफ्तारी या अभियान के दौरान कार्रवाई के लिए आगे बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि कोल्हान क्षेत्र में बेहतर पुलिसिंग के लिए लगातार काम किया जा रहा है। पुलिस का उद्देश्य अपने कार्यों के माध्यम से जनता का विश्वास मजबूत करना है।




