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कोल्हानलोकल न्यूज़

Jadugoda/Musabani : काशीडीह टोला को राजस्व गांव घोषित करने की मांग तेज, ग्रामीणों ने किया जोरदार प्रदर्शन

विकास योजनाओं से वंचित होने का आरोप, झामुमो नेता बाघ राय मार्डी ने उठाई आवाज

  • 130 आदिवासी परिवारों ने मांगा राजस्व गांव का दर्जा

जादूगोड़ा/मुसाबनी : मुसाबनी प्रखंड के फॉरेस्ट ब्लॉक पंचायत अंतर्गत सोमायडीह गांव के काशीडीह टोला में विकास की अनदेखी के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश रविवार को खुलकर सामने आया। झामुमो नेता बाघ राय मार्डी की अगुवाई में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने प्रदर्शन करते हुए काशीडीह टोला को अलग राजस्व गांव घोषित करने की मांग उठाई। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से विकास योजनाओं का लाभ नहीं मिलने के कारण क्षेत्र बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने कहा कि यदि काशीडीह को अलग राजस्व गांव का दर्जा मिल जाता है तो यहां विकास कार्यों में तेजी आएगी और सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ ग्रामीणों तक पहुंच सकेगा।

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विकास की मांग को लेकर ग्रामीणों का फूटा आक्रोश

झामुमो नेता बाघ राय मार्डी ने बताया कि जादूगोड़ा थाना क्षेत्र के सोमायडीह गांव के अंतर्गत सोमायडीह खुडराकोचा, नागकाटी, कुंदीबेड़ा, चिडुडीह, भट्टागोड़ा, जाहेर टोला, बोमरोकोचा, कुंजागोंडा समेत कुल 12 टोले आते हैं। अधिक संख्या में टोले होने के कारण काशीडीह विकास की मुख्यधारा से पीछे रह गया है। उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य गठन के 25 वर्ष बाद भी यहां के लोगों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं। हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड माइंस के नजदीक होने के बावजूद स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार नहीं मिलता, जबकि जलमीनार, अबुआ आवास, शिक्षा और अन्य सुविधाओं का भी अभाव बना हुआ है।

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12 टोले वाले गांव में विकास से वंचित काशीडीह की पीड़ा

ग्रामीण मिर्जा सोरेन, विजय बोदरा, रामदास हेंब्रम, सुरेंद्र नाथ मुर्मू तथा काशीडीह के टोला प्रधान भीलूराम बेसरा ने बताया कि गांव के लोगों को सात किलोमीटर दूर सूरदा क्रॉसिंग से राशन लाना पड़ता है। कई चापाकल खराब पड़े हैं और नेटवर्क की समस्या भी बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पानी, शिक्षा, आवास और हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड की सीएसआर योजनाओं का लाभ भी गांव तक नहीं पहुंच रहा है। लगभग 130 आदिवासी परिवारों वाले काशीडीह के ग्रामीणों का मानना है कि अलग राजस्व गांव का दर्जा मिलने से विकास योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होगा और लोगों को उनका अधिकार मिल सकेगा। अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है।

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