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Potka : राम और कृष्ण का सम्मिलित स्वरूप ही रामकृष्ण परमहंस हैं : सुनील दे

रामकृष्ण कथामृत उत्सव के पंचम दिवस श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक संदेशों की रही छटा

  • श्रद्धालुओं की सहभागिता से उत्सव में बढ़ा आध्यात्मिक उत्साह

पोटका : पोड़ा भालकी गांव में माताजी आश्रम, हाता के तत्वावधान में आयोजित आठ दिवसीय रामकृष्ण कथामृत उत्सव का पंचम दिवस श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत संध्या आरती के साथ हुई, जिसे सुधांशु शेखर मिश्र ने संपन्न कराया। कार्यक्रम में कर्ण मंडल ने उपस्थित श्रद्धालुओं का स्वागत किया, जबकि शंकर चंद्र गोप ने महेंद्र गुप्त के जीवन और उनके आध्यात्मिक योगदान पर प्रकाश डाला। बड़ी संख्या में आसपास के गांवों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने उत्सव में भाग लेकर आध्यात्मिक वातावरण का आनंद लिया।

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कथामृत पाठ, भक्ति गीत और संकीर्तन से भक्तिमय हुआ वातावरण

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सुनील कुमार दे ने कहा कि भगवान राम और भगवान कृष्ण का सम्मिलित स्वरूप ही रामकृष्ण परमहंस हैं। उन्होंने कहा कि रामकृष्ण परमहंस ने सभी वर्गों और समुदायों के लोगों को समान रूप से अपनाकर धर्म को सरल और जनसुलभ बनाया। इस अवसर पर बादल मामा ने कथामृत पाठ करते हुए रामकृष्ण परमहंस को “विवाद भंजन ठाकुर” की संज्ञा दी। वहीं भारती मंडल ने मां शारदा देवी और स्वदेश मंडल ने स्वामी विवेकानंद के विचारों का पाठ किया। कार्यक्रम के दौरान भक्ति गीत, हरिनाम संकीर्तन और हरिलूट का भी आयोजन किया गया। उत्सव का संचालन सुनील कुमार दे ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन मुकुल मंडल ने किया।

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