
सरायकेला : राष्ट्रीय गैर संचारी रोग (एनसीडी) कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित जन-जागरूकता अभियान के तहत सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस, सरायकेला में एक दिवसीय मुख एवं दंत स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। इस दौरान राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम (एनटीसीपी) तथा राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत भी जागरूकता सत्र आयोजित किए गए। शिविर में कुल 120 छात्राओं के मुख एवं दंत स्वास्थ्य की जांच की गई। विशेषज्ञों ने छात्राओं को दांतों और मुख की स्वच्छता बनाए रखने, सही तरीके से ब्रश करने, संतुलित आहार अपनाने तथा दंत रोगों से बचाव के उपायों की विस्तृत जानकारी दी। साथ ही मुख संबंधी बीमारियों की प्रारंभिक पहचान और समय पर उपचार के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।
इसे भी पढ़ें : Gua : सारंडा के ग्रामीणों ने शिक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने की उठाई मांग, करमपदा और थोलकोबाद स्कूल के उन्नयन पर जोर
तंबाकू सेवन के दुष्प्रभावों से कराया गया अवगत
राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित जागरूकता सत्र में छात्राओं को तंबाकू एवं तंबाकू उत्पादों के सेवन से होने वाले गंभीर दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि गुटखा, खैनी, पान मसाला, बीड़ी और सिगरेट जैसे उत्पाद मुख कैंसर, फेफड़ों के कैंसर, हृदय रोग सहित कई जानलेवा बीमारियों के प्रमुख कारण हैं। छात्राओं से स्वयं तंबाकू से दूर रहने तथा अपने परिवार और समाज के अन्य लोगों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया गया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और नशामुक्त समाज निर्माण में युवाओं की भूमिका पर भी जोर दिया।
इसे भी पढ़ें : Kiriburu : किरीबुरू में 11 केवी लाइन से 100 मीटर कॉपर तार चोरी, कई इलाकों की बिजली आपूर्ति ठप
मानसिक स्वास्थ्य और स्वस्थ जीवनशैली पर भी दिया गया संदेश
कार्यक्रम के दौरान मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किया गया, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, मानसिक रोगों के सामान्य लक्षण, समय पर पहचान, बचाव और उपचार संबंधी जानकारी दी गई। शिविर के समापन पर विद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों एवं छात्राओं को तंबाकू मुक्त जीवन अपनाने तथा स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने की शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम में सदर अस्पताल सरायकेला की दंत चिकित्सक, दंत स्वास्थ्य विज्ञानी, राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के परामर्शी, समाजसेवी, विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा अन्य विद्यालय कर्मी उपस्थित रहे। प्रतिभागियों ने इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों को विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और भविष्य के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।




