
- आदिवासी संस्कृति और प्रकृति संरक्षण का संदेश देती है आषाढ़ी पूजा
जादूगोड़ा : डुमरिया प्रखंड अंतर्गत केन्दुआ पंचायत के जंगल ब्लॉक स्थित ग्राम गमिराकोचा के जाहेरथान में आषाढ़ माह के पावन अवसर पर पारंपरिक आषाढ़ी पूजा श्रद्धा और विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। पूजा का नेतृत्व नाया (मुख्य पुजारी) हरिपद सरदार तथा कुड़ाम देवरी (सहायक पुजारी) पुरेन सरदार ने किया। पूजा-अर्चना के दौरान अच्छी वर्षा, बेहतर खेती, क्षेत्र की सुख-शांति, समृद्धि, पशुओं के स्वास्थ्य तथा जनकल्याण की कामना की गई। नाया हरिपद सरदार ने कहा कि आषाढ़ी पूजा प्रकृति के प्रति श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है तथा मानव और प्रकृति के बीच गहरे संबंध को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन से ही पर्यावरणीय संतुलन तथा जीवन की निरंतरता संभव है।
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पूर्वजों की परंपरा को निभाते हुए ग्रामीणों ने की विशेष पूजा-अर्चना
ग्राम प्रधान उमापद सरदार ने बताया कि गांव के पूर्वजों की परंपरा के अनुसार प्रत्येक वर्ष जाहेरथान में आषाढ़ी पूजा का आयोजन किया जाता है। यह पूजा क्षेत्र में सुख-शांति, समृद्धि और समय पर अच्छी वर्षा की कामना के लिए की जाती है। ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पाठा और मुर्गा की बलि अर्पित कर इंद्र देव को प्रसन्न करने तथा अच्छी फसल और खुशहाली की प्रार्थना की। इस अवसर पर जदयू के जिला महासचिव बीर सिंह देवगम ने भी ग्रामीणों के साथ पूजा में भाग लिया और गांव की उन्नति तथा शांति की कामना की। पूरे आयोजन में पारंपरिक संस्कृति और आस्था की झलक देखने को मिली।
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जाहेरथान की घेराबंदी और संरक्षण की उठी मांग
पूजा समारोह के दौरान ग्रामीणों ने सरकार से गमिराकोचा के जाहेरथान की घेराबंदी कराने की मांग भी की। ग्रामीणों का कहना था कि अन्य गांवों के जाहेरथानों की तरह इस धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल का भी संरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जाहेरथान आदिवासी समाज की आस्था और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है, जिसकी सुरक्षा आवश्यक है। इस अवसर पर हरिपद सरदार, बलराम सरदार, पुरेन सरदार, नेत्रा सरदार, लखिंदर सरदार, निवारण सरदार, वृंदावन सरदार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।




