
- ग्रामीणों ने प्रभावित परिवारों के लिए सहायता और विशेष स्वास्थ्य अभियान की मांग उठाई
जादूगोड़ा : जादूगोड़ा थाना क्षेत्र के झरिया गांव निवासी 26 वर्षीय रितिक सिंह की ब्रेन मलेरिया से मौत हो गई। परिजनों के अनुसार रितिक को बचाने के लिए उसे रांची स्थित रिम्स अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। युवक की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मृतक के पिता विजय सिंह, बहन अंजली सिंह और चाचा बाबूलाल सिंह ने बताया कि इलाज में अब तक करीब 30 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं, जिसके कारण परिवार आर्थिक संकट में आ गया है। हालत यह है कि अंतिम संस्कार के लिए भी पैसे नहीं बचे हैं। परिजनों ने झारखंड सरकार से आर्थिक सहायता देने की मांग की है। रितिक की बहन अंजली सिंह ने बताया कि 5 जुलाई को उसे तेज बुखार और अन्य लक्षणों के बाद ब्रेन मलेरिया होने का पता चला था। पहले घर पर इलाज कराया गया, लेकिन स्वास्थ्य में सुधार नहीं होने पर उसे गालूडीह के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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कई अस्पतालों में इलाज के बाद भी नहीं बच सकी युवक की जान
परिजनों के मुताबिक निजी अस्पताल में इलाज के बाद भी रितिक की स्थिति में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उसे जमशेदपुर सदर अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई। वहां से गंभीर हालत को देखते हुए एमजीएम अस्पताल रेफर किया गया। एमजीएम अस्पताल के चिकित्सकों ने भी स्थिति चिंताजनक पाते हुए उसे रिम्स, रांची भेज दिया। परिजनों ने बताया कि रांची की दूरी अधिक होने और हालत लगातार बिगड़ने के कारण रास्ते में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को निजी वाहन से झरिया गांव लाया गया, जहां शनिवार देर शाम अंतिम संस्कार किया गया। रितिक की मौत के बाद पूरे गांव में शोक और भय का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लगातार ब्रेन मलेरिया के मामले सामने आ रहे हैं, जिससे लोग दहशत में हैं। दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार चलाने वाले विजय सिंह के लिए यह घटना दोहरी मार साबित हुई है।
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पोटका में ब्रेन मलेरिया पर नियंत्रण बड़ी चुनौती, अब तक छह मौतें
पोटका प्रखंड में ब्रेन मलेरिया का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। रितिक सिंह की मौत के साथ ही इस बीमारी से मरने वालों की संख्या छह पहुंच गई है। स्वास्थ्य विभाग ने बीमारी पर नियंत्रण के लिए कई कदम उठाए हैं। जिला सिविल सर्जन डॉ. साहिर पोल के निर्देश पर चिकित्सकों की विशेष टीम क्षेत्र में तैनात की गई है और जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। इसके बावजूद मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पोटका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी रंजनी कांत महाकुड को निलंबित कर डॉ. सुकांत सीट को नया प्रभारी बनाया गया है। अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती क्षेत्र में फैल रहे ब्रेन मलेरिया पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से गांव-गांव विशेष जांच अभियान चलाने, दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने और प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता देने की मांग की है।




