Jamshedpur : सामाजिक कार्यकर्ता का TATA STEEL से चार सवाल, CSR के तहत खर्च का ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग
कहा, पूर्वी सिंहभूम मलेरिया की चपेट में टाटा स्टील की चुप्पी चिंताजनक

जमशेदपुर : सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता दीपक रंजीत ने टाटा स्टील से सीएसआर का ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग की. उन्होंने कहा पूर्वी सिंहभूम जिला इन दिनों गंभीर मलेरिया संकट से जूझ रहा है। पोटका, मुसाबनी, डुमरिया, घाटशिला सहित कई प्रखंडों में मलेरिया के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है तथा कई लोगों की मौत की खबरें सामने आ रही हैं। ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और प्रभावित लोगों तक तत्काल सहायता पहुंचाने की दिशा में टाटा स्टील की ओर से क्या कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि पूर्वी सिंहभूम जिला टाटा स्टील का प्रमुख कार्यक्षेत्र है। कंपनी प्रत्येक वर्ष कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास पर करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करती है। ऐसे में जब पूरा जिला मलेरिया जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है, तब टाटा स्टील की ओर से जिले में किसी व्यापक विशेष मलेरिया नियंत्रण अभियान की जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।
उन्होंने कहा कि पोटका विधानसभा के विधायक संजीव सरदार ने भी मलेरिया की गंभीर स्थिति को देखते हुए टाटा स्टील प्रबंधन को इस संबंध में लिखित आवेदन देकर प्रभावित क्षेत्रों में विशेष स्वास्थ्य एवं मलेरिया नियंत्रण अभियान चलाने का आग्रह किया है। किंतु अब तक इस दिशा में किसी प्रभावी कार्रवाई या व्यापक अभियान की जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। यह स्थिति चिंता का विषय है।
दीपक रंजीत ने कहा कि यदि CSR का वास्तविक उद्देश्य समाज के संकट के समय उसके साथ खड़ा होना है, तो आज पूर्वी सिंहभूम को उसी जिम्मेदारी की आवश्यकता है।केवल वार्षिक रिपोर्ट में खर्च का उल्लेख पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका प्रभाव गांवों, बस्तियों और प्रभावित परिवारों तक स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए गए कार्यों का ब्यौरा दे कंपनी
सामाजिक कार्यकर्ता दीपक रंजीत ने टाटा स्टील से स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में किए गए कार्यों के संबंध में उपलब्धियां साझा करने की मांग की. इसके लिए उन्होंने कंपनी से पूछा कि पूर्वी सिंहभूम में मलेरिया नियंत्रण के लिए कोई विशेष CSR अभियान कंपनी की ओर से चलाया जा रहा है? साथ ही यह भी पूछा कि कितने गांवों में कंपनी के द्वारा मेडिकल कैंप लगाए गए हैं? साथ ही इन कैंप में कितने लोगों की जांच एवं उपचार किया गया है? उन्होंने पुछा कि जरूरतमंदों के बीच कितनी मच्छरदानियां तथा आवश्यक दवाइयां वितरित की गई हैं? वहीं हाल के दिनों में आए मलेरिया संकट के दौरान CSR मद से कुल कितनी राशि खर्च की गई है?
दीपक रंजीत ने कहा कि टाटा स्टील को जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर तत्काल व्यापक मलेरिया नियंत्रण अभियान प्रारंभ करना चाहिए। प्रभावित गांवों में मेडिकल टीम, मोबाइल हेल्थ यूनिट, निःशुल्क जांच, दवा वितरण, मच्छरदानियों की उपलब्धता तथा जनजागरूकता अभियान युद्धस्तर पर संचालित किए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि पूर्वी सिंहभूम के लोगों को इस कठिन समय में केवल संवेदनाएं नहीं, बल्कि ठोस और प्रभावी सहयोग की आवश्यकता है। समाज यह अपेक्षा करता है कि क्षेत्र की सबसे बड़ी औद्योगिक कंपनी अपने CSR की भावना के अनुरूप इस जनस्वास्थ्य संकट में अग्रणी भूमिका निभाए और अपने सामाजिक दायित्व का निर्वहन पारदर्शिता एवं जवाबदेही के साथ करे।
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