जमशेदपुर में SIR के विरोध में प्रदर्शन, “ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करो” के नारों के साथ जनसभा
जनांदोलन एकजुटता मंच के बैनर तले साकची बिरसा चौक पर जुटे प्रदर्शनकारी, वक्ताओं ने SIR प्रक्रिया रद्द करने समेत कई मांगें उठाईं

जमशेदपुर: जनांदोलन एकजुटता मंच के बैनर तले शनिवार, 26 सितंबर 2026 को साकची स्थित बिरसा चौक पर SIR के विरोध में प्रदर्शन और जनसभा आयोजित की गई। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर सवाल उठाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई और SIR प्रक्रिया रद्द करने की मांग की। कार्यक्रम के दौरान पर्चे भी वितरित किए गए।
वक्ताओं ने उठाईं कई मांगें
सभा का संचालन मन्थन, सुमित राय, सुजय राय और डेमका सोय ने संयुक्त रूप से किया। रईस अफरीदी, शाहिद, सुखचन्द्र झा, अर्पिता, बैद्यनाथ प्रसाद, जगधर मंडल, सीपीआई के देवाशीष मुखर्जी, जगत और सोहन महतो समेत अन्य वक्ताओं ने सभा को संबोधित किया।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली से चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने और उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग की। साथ ही SIR की पूरी प्रक्रिया रद्द करने की मांग भी रखी गई।
SIR से जुड़े फैसलों पर उठाए सवाल
सभा में वक्ताओं ने मांग की कि SIR के आधार पर तैयार मतदाता सूची से हुए चुनावों को रद्द कर, जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं उन्हें फिर से जोड़कर पुरानी और सही मतदाता सूची के आधार पर चुनाव कराया जाए।
वक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से मामले पर स्वतः संज्ञान लेने और नए चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की मांग भी उठाई। इसके अलावा चुनाव आयोग की चयन समिति की संरचना में बदलाव कर उसमें सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को शामिल करने की मांग की गई।
पर्चे में लगाए गए कई आरोप
कार्यक्रम में वितरित पर्चे में दावा किया गया कि SIR के कारण देश में 10 प्रतिशत से अधिक आबादी को मतदाता सूची से हटाया गया है। पर्चे में झारखंड में 44 लाख मतदाताओं के हटाए जाने तथा लगभग 63 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाने का दावा किया गया।
इन दावों के अनुसार, मैपिंग और “तार्किक विसंगति” के आधार पर जारी नोटिसों से आदिवासी, मूलवासी, दलित, वंचित, भूमिहीन, अशिक्षित, महिलाओं और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को परेशानी हो रही है। आयोजकों ने बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका भी जताई।
चुनावी सॉफ्टवेयर को लेकर भी आरोप
पर्चे में यह भी आरोप लगाया गया कि ऐसा सॉफ्टवेयर लागू किया गया है, जिसके माध्यम से दिल्ली से किसी भी राज्य की मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया संभव हो गई है। आयोजकों ने दावा किया कि पहले मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का काम प्रत्यक्ष सत्यापन के साथ ERO स्तर पर किया जाता था।
कार्यक्रम में चुनाव आयुक्तों को कानूनी संरक्षण दिए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा बनाए गए कानून का इस्तेमाल चुनाव आयुक्तों को संरक्षण देने के लिए किया गया है।
आंदोलन जारी रखने का आह्वान
सभा में वक्ताओं ने लोगों से SIR के खिलाफ आंदोलन में शामिल होने तथा भारतीय नागरिकता और लोकतांत्रिक व्यवस्था के भविष्य को लेकर आवाज उठाने का आह्वान किया।
आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम को सफल बनाने में सियाशरण शर्मा, राजश्री, लिलि शर्मा, रामकवीन्द्र सिंह, सुखचन्द्र झा, गणेश राम, रबीन्द्र प्रसाद, गौतम बोस, सपन दासगुप्ता, अंकुर शाश्वत, मो. शाहिद, अशोक शुभदर्शी, जयकिशोर, अजय मेहताब, मनोज गुप्ता, सुखवंत सिंह, विकास कुमार और उजागिर यादव समेत अन्य लोगों की भूमिका रही।
नोट: कार्यक्रम में लगाए गए SIR, मतदाता सूची और चुनाव आयोग से संबंधित आंकड़े एवं आरोप आयोजकों/वक्ताओं द्वारा प्रस्तुत किए गए हैं। इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि कार्यक्रम में रखे गए दावों के रूप में प्रस्तुत किया गया है।




