Musabani : 54 साल से लंबित मुआवजे को लेकर परिवार का आंदोलन तेज, सूरदा खदान गेट पर अनशन का ऐलान
पारिवारिक जमीन पर कंपनी के कब्जे का आरोप, मुआवजा नहीं मिलने पर नाकेबंदी की चेतावनी

मुसाबनी : मुसाबनी क्षेत्र में पारिवारिक जमीन के मुआवजे को लेकर एक बार फिर संघर्ष तेज होता दिखाई दे रहा है। मनबोध पातर के नाती दीपक पातर ने अपने परिवार के साथ सूरदा खदान गेट पर एकदिवसीय अनशन करने की घोषणा की है। परिवार का आरोप है कि लगभग 54 वर्षों से उनकी जमीन पर कंपनी का कब्जा है, लेकिन आज तक उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिला। परिवार का कहना है कि यदि अनशन के दिन कंपनी प्रबंधन द्वारा मुआवजे का चेक नहीं दिया गया तो अगले ही दिन से खदान गेट पर नाकेबंदी आंदोलन शुरू किया जाएगा। इस घोषणा के बाद क्षेत्र में मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। परिवार का दावा है कि वर्षों से न्याय की उम्मीद में विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है।
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1974 के समझौते का हवाला, कई स्तरों पर भेजे गए आवेदन

परिवार के अनुसार 13 फरवरी 1974 को भागवत पातर, मनबाट तांती, सूजन तांती टाटी, लोचन तांती और हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के बीच जमीन संबंधी एक समझौता हुआ था। आरोप है कि इस समझौते के बावजूद प्रभावित परिवारों को आज तक न्याय और मुआवजा नहीं मिल पाया। दीपक पातर ने बताया कि 10 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री, केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री, विधि सचिव, अपर सचिव, संयुक्त सचिव, मुख्यमंत्री, प्रधान सचिव, जिला उपायुक्त, अनुमंडल पदाधिकारी, पुलिस निरीक्षक तथा मुसाबनी प्रशासन सहित कई अधिकारियों को विज्ञापन और आवेदन भेजा गया था। इसके बाद लगभग 15 दिन पूर्व पुनः ज्ञापन देकर 17 जून से प्रस्तावित अनशन की जानकारी भी दी गई। परिवार का कहना है कि प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को बार-बार अवगत कराने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।
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“जमीन हमारी, हक हमारा” के नारों के साथ आंदोलन की तैयारी
दीपक पातर ने कहा कि जमीन जाने के बाद भी परिवार को न तो रोजगार मिला और न ही मुआवजे का लाभ। उन्होंने बताया कि वर्षों से लंबित इस मामले ने परिवार की आर्थिक स्थिति को कमजोर कर दिया है। आंदोलन के समर्थन में परिवार ने कई नारे भी जारी किए हैं, जिनमें “जमीन हमारी, हक हमारा”, “वादा नहीं अधिकार चाहिए”, “जमीन गई रोजगार नहीं, आखिर यह कैसा विकास” और “एक ही मांग, एक ही नारा—न्याय मिले अबकी बार” शामिल हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस बार भी समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। हालांकि समाचार लिखे जाने तक इस मामले में कंपनी प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी थी। प्रतिक्रिया मिलने पर उसका पक्ष भी प्रकाशित किया जाएगा।




