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कोल्हानलोकल न्यूज़

Kiriburu : किरीबुरू में जंगली हाथी की दस्तक से दहशत, ड्रोन से निगरानी कर रहा वन विभाग

खदान क्षेत्र तक पहुंचा हाथी, कर्मचारियों और स्थानीय लोगों में बढ़ी चिंता

  • जंगलों से शहरी क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है हाथियों का रुख

किरीबुरू : गुवा क्षेत्र के किरीबुरू शहरी इलाके में एक जंगली हाथी की मौजूदगी से लोगों में दहशत का माहौल है। किरीबुरू-हिलटॉप मुख्य मार्ग पर पुराने मैगजीन घर के समीप जंगल में हाथी के डेरा डालने की सूचना के बाद वन विभाग सतर्क हो गया है। जानकारी के अनुसार, 29 जून की रात हाथी अचानक सड़क पार करते हुए सेल की मेघाहातुबुरु खदान के मैकेनिकल शॉवेल सेक्शन तक पहुंच गया। रात करीब 11 बजे हाथी को खदान क्षेत्र में देखकर वहां कार्यरत कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई और सभी सुरक्षा के मद्देनजर सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हाथी कुछ समय तक खदान क्षेत्र में घूमता रहा और बाद में जंगल की ओर लौट गया, लेकिन उसकी गतिविधियों ने क्षेत्रवासियों की चिंता बढ़ा दी है।

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सुबह फिर दिखा हाथी, वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी

मंगलवार सुबह करीब 5:30 बजे स्थानीय लोगों ने पुराने मैगजीन घर के पास उसी हाथी को दोबारा देखा, जिसके बाद वन विभाग को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही विभाग की टीम मौके पर पहुंची और हाथी की गतिविधियों पर नजर रखना शुरू कर दिया। वन विभाग के कर्मी शंकर पांडेय ने बताया कि हाथी की सटीक लोकेशन और उसकी गतिविधियों की निगरानी के लिए ड्रोन ऑपरेटर की सहायता ली जा रही है। ड्रोन के माध्यम से हाथी की स्थिति का पता लगाकर उसे सुरक्षित तरीके से घने जंगल की ओर भेजने की योजना बनाई गई है। विभाग लगातार क्षेत्र की निगरानी कर रहा है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

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लोगों से सतर्क रहने और हाथी से दूरी बनाए रखने की अपील

वन विभाग ने स्थानीय लोगों, सेल कर्मियों और राहगीरों से अपील की है कि वे हाथी के पास जाने या उसे छेड़ने का प्रयास न करें। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि ऐसा करने पर हाथी उग्र हो सकता है, जिससे जान-माल का नुकसान हो सकता है। विभाग ने बताया कि हाल के वर्षों में सारंडा और आसपास के जंगलों से हाथियों का रिहायशी एवं औद्योगिक क्षेत्रों की ओर आना बढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में बढ़ती मानवीय गतिविधियों और प्राकृतिक संसाधनों की कमी के कारण वन्यजीवों का मानव बस्तियों की ओर रुख बढ़ रहा है। यह स्थिति वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा दोनों के लिए चुनौती बनती जा रही है।

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